35 मामलों में सुना चुके हैं फांसी की सजा, अब फैमिली कोर्ट में हुई तैनाती; ADJ रवि दिवाकर फिर चर्चा में

मुजफ्फरनगर: अपने 17 साल के न्यायिक करियर में 35 मामलों में मृत्युदंड की सजा सुना चुके अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर चर्चा में हैं। मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट में तैनात रहे दिवाकर को अब फैमिली कोर्ट में अपर प्रधान न्यायाधीश बनाया गया है। वह जिले में ही अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। मुजफ्फरनगर में पिछले पांच महीनों के दौरान वह 10 मामलों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुना चुके हैं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को मुजफ्फरनगर में तीन न्यायिक अधिकारियों की तैनाती में बदलाव किया। इसके तहत अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंजुला भलोटिया को महिला अपराधों की सुनवाई के लिए गठित फास्ट ट्रैक कोर्ट में नियुक्त किया गया है। वहीं, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिव कुमारी को 14वें वित्त आयोग के तहत गठित अदालत में भेजा गया है।

फैमिली कोर्ट में संभालेंगे नई जिम्मेदारी

रवि कुमार दिवाकर अब फास्ट ट्रैक कोर्ट के बजाय फैमिली कोर्ट में अपर प्रधान न्यायाधीश के रूप में कार्य करेंगे। अपने कार्यकाल के दौरान वह मुजफ्फरनगर, बरेली और अन्य जिलों में तैनाती के समय कुल 35 मामलों में मृत्युदंड की सजा सुना चुके हैं। उनके न्यायिक करियर की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी।

ज्ञानवापी मामले में आदेश के बाद सुरक्षा को लेकर जताई थी चिंता

रवि कुमार दिवाकर 29 नवंबर 2025 से मुजफ्फरनगर की अदालत में तैनात हैं। इससे पहले वह वाराणसी में न्यायिक जिम्मेदारी संभाल रहे थे। ज्ञानवापी परिसर से जुड़े मामले में आदेश देने के बाद उन्होंने धमकियां मिलने का आरोप लगाया था। उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) को पत्र भी लिखा था।

अगस्त में उनकी अदालत से वापस लिए गए थे हत्या के 97 मामले

इस साल अगस्त में मुजफ्फरनगर के जिला जज ने रवि दिवाकर की अदालत से हत्या से जुड़े 97 मुकदमे वापस ले लिए थे। अपने न्यायिक करियर में वह संभल, बरेली, वाराणसी, सुल्तानपुर, आजमगढ़, बदायूं और चित्रकूट सहित कई जिलों में सेवाएं दे चुके हैं।

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